गुरुवार, 26 जनवरी 2017

कहें पद्माकर जू,,,!

'बड़ी जीजी' हम सब भाई बहिनों में सबसे बड़ी हैं। उम्रमें वे मुझसे आठ साल बड़ी हैं। विगत २२ दिसम्बर को जब 'आनंदम' के मित्रों ने और सपरिजनों ने मेरा जन्म दिन मनाया और शुभकामनाएँ दीं तब 'बड़ी जीजी ' मेरे पास ही थीं। उन्होंने मुझे बताया कि मेरा जन्म 'बसन्त पंचमी' को हुआ था ! उनकी याददास्त के अनुसार स्कूल में मेरी उम्र एक साल ज्यादा लिखी गई। याने मैं एक साल पहले ही रिटायर हो चूका हूँ। यह जानकर मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ !मेरी जन्म तारीख  स्कूल में सही नहीं लिखी गयी या मुझे किसी ने  बताया नहीं तो इसमें मेरी क्या त्रुटि है? हालाँकि हमारे रिटायर जनरल बी'के सिंह [अब केंद्रीय मंत्री] की तरह मुझे कोई कोर्टबाजी नहीं करनी। क्योंकि मैं जानता हूँ कि ५०-६० साल पहले वाले भारत के ठेठ गाँव के सरकारी स्कूल में भी पढाई अच्छी होती थी, और हमारे लिए यही बहुत है। जन्म तारीख इत्यादि का तब खास ध्यान नहीं रखा जाता था।

सभी मित्रों,सुह्र्दयजनों और सपरिजनों को  'बसन्त पंचमी' की शुभकामनाएँ ! इस अवसर पर महाकवि पद्माकर की चार पंक्तियाँ प्रस्तुत हैं :-  



''कूलनमें केलिमें कछारनमें कुंजनमें, क्यारिनमें कलित कलीन किलकंत है।

द्वार में दिशान में दूनी देश-देशन में ,देख्यों दीप दीपन में  दीपत  दिगंत है।।

कहें पद्माकर जू  परागन में पौन में ,पाकन में पिक में पलाशन पगंत है।

बेलि में बितान में ,बेलन नवेलन में, बनन में बागन में बगरो बसन्त है।। ''

हालाँकि मैं अच्छस तरह जानता हूँ कि इस कड़कड़ाती ठण्ड और धूल धुआँ -धुंध से परेशान लोगों को पद्माकर का रीतिकालीन ' बसन्त सौंदर्य' अथवा बसन्तोत्सव नहीं बल्कि इससे कठिन दौर से शीघ्र निजात चाहिए !


''पद्माकर '' 

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