गुरुवार, 5 जनवरी 2017

भर्राशाही मची है भाई


रघुकुल रीति सदा चलि आई,

 राजनीती दुष्टों को भायी,

भले श्री राम गए वनराई ,

भरत भाई ने प्रीत निभाई ,

उसी भरत के भारत में अब ,

भाई-भाई में कटुता आई ,

जीत चुनाव वोट की खातिर , 

भाई की हत्या करवाई ,


देशभक्ति  दल वाले भाई ,

आईएस की जूँठन खाई ,

 हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई,

 संग-संग छाने दूध मलाई।

खा पीकर  सब गर्रा गए जब ,

विरोधियों की करें कुटाई,


लगा तुषार फसल को भाई ,

निर्धन किसान पै विपदाआई।

बागड़  खेत चरत है भाई   ,

कैसे दुर्दिन आये भाई  ।


जात पाँत मजहब के बूते ,

लोकतंत्र की  रस्म निभाई।

वे कहते अच्छे दिन आए ,

मजा मौज में लोग लुगाई ,

खबर पढ़ी अखवार में भाई ,

एक बृद्ध देह चूहों ने खाई,

कोई किसी का नहीं है भाई ,

झूँठी आस दिलासा भाई ,

भर्राशाही मची है भाई    ,

जनहित सुध सबने बिसराई !


श्रीराम तिवारी






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