रघुकुल रीति सदा चलि आई,
राजनीती दुष्टों को भायी,
भले श्री राम गए वनराई ,
भरत भाई ने प्रीत निभाई ,
उसी भरत के भारत में अब ,
भाई-भाई में कटुता आई ,
जीत चुनाव वोट की खातिर ,
भाई की हत्या करवाई ,
देशभक्ति दल वाले भाई ,
आईएस की जूँठन खाई ,
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई,
संग-संग छाने दूध मलाई।
खा पीकर सब गर्रा गए जब ,
विरोधियों की करें कुटाई,
लगा तुषार फसल को भाई ,
निर्धन किसान पै विपदाआई।
बागड़ खेत चरत है भाई ,
कैसे दुर्दिन आये भाई ।
जात पाँत मजहब के बूते ,
लोकतंत्र की रस्म निभाई।
वे कहते अच्छे दिन आए ,
मजा मौज में लोग लुगाई ,
खबर पढ़ी अखवार में भाई ,
एक बृद्ध देह चूहों ने खाई,
कोई किसी का नहीं है भाई ,
झूँठी आस दिलासा भाई ,
भर्राशाही मची है भाई ,
जनहित सुध सबने बिसराई !
श्रीराम तिवारी

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