शुक्रवार, 27 जनवरी 2017

कोयल गाती तो है।


गुजरी हुई हर रात के बाद,इक नयी सुबह आती तो है।

नेक इंसानके घर आँगनमें पेड़ हो तो गौरैया गाती तो है।।

हर एक तितली जीती है ख़ुशी-ख़ुशी अपनी जिंदगी पूरी ,

जीवन भले हो महज आठ पहर का फिरभी सुहाती तो है।

सुख-दुःख, हानि-लाभ , मानवीय छल-कपट से बेखबर ,

तयशुदा मौसम में कोयल अमुआकी डालीपर गाती तो है।

 आपाधापीयुक्त शहर की अभिजात्य कोठियों में न सही ,

 गाँवकी झोपडी से अभी भी लोरी की आवाज आती तो है।

गौरैया,तितली,कोयल,माँ की लोरी ,नयी सुबह का कलरव,

 अभी भी इंसान को जिंदगी जीने की उमंग जगाती तो है।

  - श्रीराम तिवारी !




गुरुवार, 26 जनवरी 2017

कहें पद्माकर जू,,,!

'बड़ी जीजी' हम सब भाई बहिनों में सबसे बड़ी हैं। उम्रमें वे मुझसे आठ साल बड़ी हैं। विगत २२ दिसम्बर को जब 'आनंदम' के मित्रों ने और सपरिजनों ने मेरा जन्म दिन मनाया और शुभकामनाएँ दीं तब 'बड़ी जीजी ' मेरे पास ही थीं। उन्होंने मुझे बताया कि मेरा जन्म 'बसन्त पंचमी' को हुआ था ! उनकी याददास्त के अनुसार स्कूल में मेरी उम्र एक साल ज्यादा लिखी गई। याने मैं एक साल पहले ही रिटायर हो चूका हूँ। यह जानकर मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ !मेरी जन्म तारीख  स्कूल में सही नहीं लिखी गयी या मुझे किसी ने  बताया नहीं तो इसमें मेरी क्या त्रुटि है? हालाँकि हमारे रिटायर जनरल बी'के सिंह [अब केंद्रीय मंत्री] की तरह मुझे कोई कोर्टबाजी नहीं करनी। क्योंकि मैं जानता हूँ कि ५०-६० साल पहले वाले भारत के ठेठ गाँव के सरकारी स्कूल में भी पढाई अच्छी होती थी, और हमारे लिए यही बहुत है। जन्म तारीख इत्यादि का तब खास ध्यान नहीं रखा जाता था।

सभी मित्रों,सुह्र्दयजनों और सपरिजनों को  'बसन्त पंचमी' की शुभकामनाएँ ! इस अवसर पर महाकवि पद्माकर की चार पंक्तियाँ प्रस्तुत हैं :-  



''कूलनमें केलिमें कछारनमें कुंजनमें, क्यारिनमें कलित कलीन किलकंत है।

द्वार में दिशान में दूनी देश-देशन में ,देख्यों दीप दीपन में  दीपत  दिगंत है।।

कहें पद्माकर जू  परागन में पौन में ,पाकन में पिक में पलाशन पगंत है।

बेलि में बितान में ,बेलन नवेलन में, बनन में बागन में बगरो बसन्त है।। ''

हालाँकि मैं अच्छस तरह जानता हूँ कि इस कड़कड़ाती ठण्ड और धूल धुआँ -धुंध से परेशान लोगों को पद्माकर का रीतिकालीन ' बसन्त सौंदर्य' अथवा बसन्तोत्सव नहीं बल्कि इससे कठिन दौर से शीघ्र निजात चाहिए !


''पद्माकर '' 

मंगलवार, 24 जनवरी 2017

बिकट संकट गणतंत्रानाम,,,,,!



परपीड़ा ददामि महापुण्यम, श्रमशोषण पापनाशनम !

कालाधन स्वर्गसोपानाम , रिश्वतखोरी मोक्षदायकम  !!


मक्कारी मुफ़्तखोरानाम ,आरक्षण भवभय हारणीम !

 नायक: भवतु खलनायक:,एष : नवभारतस्यलक्षणम !!


 जनानां पीड़ित:महादुष्ट:,संसदीय लोकतंत्र गतरसातलं  !

 जीवनमुक्ति सर्वहारानाम ,पूँजीवादकृत महा पातकम !!

 
   पर सम्पदा हरणम महापुण्यम, दलाली पापनाशनम !

   घटिया सार्वजनिक निर्माणम ,कमीशन मुक्तिदायकम !!


   कृतघ्नता घोरं सरकारी क्षेत्रे,शिक्षा स्वास्थ्य बँटाढारकम !

  आर्थिक पैकेज प्रदत्त निजीक्षेत्रे ,सार्वजनिक क्षेत्र नाशनं !!


   चुनाव प्रक्रिया दोषपूर्णे: नेता जाति वर्ण साम्प्रदायकम !

   महाविकट संकट भारतराष्ट्र गणतन्त्रणाम पतनम गतः !!

 

   श्रीराम तिवारी


  


सरस्वती वंदना -[रचना -श्रीराम तिवारी]

                    [१]
करुणकृन्दन विनयवाणी, हृदय हाहाकार हो।

शारदा  माँ  वीणापाणी, शब्द में साकार हो।।

अरुण मानव का जगा दे ,हीनता संहार दे।

झंझावतों में अचल हो ,वह ज्ञान दीप उजार दे।।

                  [२]


गीत की स्वर  लहरियों में, सत्य  का संधान हो।

जन में हो भ्रातत्व समता, एकता अविराम हो।।

विज्ञानसे  मानव बड़ा हो , विश्व का कल्याण हो।

मस्जिदों में शंख ध्वनियाँ, मंदिरों में अजान हो।।

                  [३]

मूक कम्पित दमित को माँ ,सिंहसी हुँकार दे।

वंचितों की वेदना को , मेदनी ललकार दे।।

 काँटे कुचल दे राह के, पंथ की पहचान हो।

 कठिनाइयों से न डरें ,आँधी या तूफ़ान हो।।

                         [४]

एकता के प्यार के सुर, छंद में सजते रहें।

नित्य नव निर्माण के हम, गीत नव रचते रहें।।

धर्मान्धता अज्ञानता का,बध अहम् का कीजिये।

दिग्भ्रमित इस राष्ट्रका माँ ,दिशि निर्देशन कीजिये।।


                       [५]

तंत्रीनाद कवित्त रस में ,विषमता धो दीजिये।

परपीड़न की कामना को ,कालकलवित कीजिये।।

निर्भय सकल जहान हो ,नीति का सम्मान हो।

ज्ञान की गंगा बहे माँ ,पंथ की पहचान हो।


                   [६]

आक्रोश जनका तब तलक,थम न जाए जानले।

कोटि -कोटि निर्धनों के ,आंसुओं को थाम ले।।

गगन - भेदी  भुवन - भेदी ,लक्ष्यभेदी   तान  दे।

शैतान का गढ़ ध्वस्त हो ,माता यही वरदान दे।।


                 [७]

कबीर नानक रहीम जैसी ,सृजना को दीजिये।

भुवनमोहन तानसेनी ,तान की लय दीजिये।।

रामायण के रचियता सा ,शिल्प का सामान हो।

 शबद साखी सुखमनी के ,सत्य का संधान हो।।

                [८]

स्वाधीनता समता जगे माँ ,बंधुता का मान हो।

 उसको बना दे माँ देवी ,जो ह्रदय पाषाण हो।।

मानवता के ग्रहण छूटें ,उत्पीड़न उन्माद के।

पिल्लर धराशायी करो माँ ,पापी पूँजीवाद के।।


            [९]

भारत में भ्रातत्व भाव की, भावना भर दीजिये।

मेहनतकशों में इंकलाबी ,गर्जना भर दीजिये।।

ज्ञानकी ज्योति जलाओ  ,जन तमस हर लीजिये।

जगके सब आतंकियोंमें ,इंसानियत भर दीजिये ।।


                                [१०]

कंठ में मानिंद शिव की, नित हलाहल पान हो।

कल्प कल्पान्तर कवि की, वेदना का ज्ञान हो।।

बलिदान की सम्भावना को, सतत सम्बल दीजिये।

जयति वाणी भारती माँ , पतित पावन कीजिये।।


  श्रीराम तिवारी








शनिवार, 21 जनवरी 2017

भारतीय सभ्यता -संस्कृति का सफरनामा [Rachana - by shriram tiwari]



  पाषाण युगीन बर्बर कबीलाई समाजों के,

 आदिम साम्यवादी स्वरूप का उदयगान ।

  सिंधु घाटी सभ्यता का प्राकृतिक विध्वंश , 

  मध्य एशियाई विस्थापितों का महाप्रयाण ।।

  भारोपीय सभ्यता संस्कृति का बीजांकुरण,

  आर्य द्रविड़ पार्वत्य जनजातिय सहउत्थान ।

  पूर्व वैदिक कालीन सभ्यता का उषाकाल ,

  आर्यसभ्यता का उत्कर्ष ऋक यजु समष्टिगान  ।।


 धनवंतरी च्यवन चरक-सुश्रुत कृत आयुर्वेद ,

 ऋषभदेव का असि -मसि-कृषि विकासगान ।

 
  शुक्राचार्य  शिवि दधीच मारीचि वैश्रवण भृगु,

  अंगिरा वशिष्ठ व्यास मनु अगस्त कण्व विद्वान ।


  आरण्यक उपनिषद दर्शन स्मृति वेदांतनामा ।

  उत्तरवैदिक सभ्यता के उत्कृष्ट अकाट्य प्रमाण ,



  सतपथ,गोपथ ,एतरेय,तैतरीय ईश  तथ्यान्वेषण,

  कार्य-कारण सिद्दांत और  ब्रह्म सूत्र अनुसन्धान।।


  सोSहम-अहंब्रह्मास्मि-'सत्यमेव जयते' उद्घोष ,

 'कृण्वन्तो  विश्वम आर्यम' ब्रह्मांड व्यापी सामगान ।
 

  कार्य-कारण  सिद्धांत विभिन्न भाष्य  दर्शन सूक्त ,

 'उदार चरितानाम  तु वसुधैव कुटुम्बकम का गान ।।


   देव दानव संघर्ष  द्वंद पुरुष-प्रकृति अंतर्द्वंद अध्यात्म,

   ज्ञान विज्ञानमय वाङ्ग्मय  मिथ-पुराण देवासुर संग्राम


   मार्क्स का द्वंदात्मक सिद्धांत बनाम सनातन धर्म सिद्धांत ,

  समुद्रमत्स्य कच्छप ,अर्द्धथल बाराह,थल वामनउपनाम ।


 आदिम युगीन हिंसक पशुतुल्य अर्धमानवतुल्य उग्र क्रोधी

  नरसिंह अवतार और प्रतिशोध के लिए परशुरामअवतार।।


  रामायणकालीन उन्नत मानव  रघुवंश सदृश्य नीति निर्धारक,

  धीरोदात्त चरित्र  संस्थापन मर्यादा पुरषोत्तम श्रीराम अवतार।


   सूर्यवंश,चन्द्रवंश, यदु-जदू-कुरु -पुरुवंश गल्प श्रुति आख्यान ,

   महाभारत कुरुक्षेत्र गीता -ज्ञान -कर्म सांख्ययोग श्रीकृष्णावतार।।



 शापित परीक्षित निधन - जनमेजय का प्रतिशोध नागयज्ञ , 

 निष्ठुर नियति  निर्मम संक्रांतिकालीन सत्ता विध्वंश अपार ।।



पुरातन क्षत्रियकुल रीति-नीति विलुप्त घोर अनैतिकता

मनुस्मृति सृजन ,नवीन आचार संहिता सृजन लोकाचार ।


भारत  'बुद्धम शरणं गच्छामि'दिग्भर्मित जन- अकर्मण्यता,

महावीर का अहिंसा अनेकान्तवाद स्याद्वाद अपरम्पार ।।


मगध नन्दवंश का अमानवीय कदाचरण, प्रमाद- विलासिता ,

चंद्रगुप्त -चाणक्य का त्याग -तपस्या, राष्ट्र नव- निर्माणनामा।   

इंडो -यूनानी सभ्यताओं का संगम, मेगास्थनीज इंडस सृजन  ,

चन्द्रगुप्त मौर्यका फिलिप्स -सेल्युकस पर महाविजयनामा।।



 रक्तपिपासु चण्ड अशोक का 'बुद्धम शरणम गच्छामि' होना ,

 कलिंगविजय ,भिख्खु -धम्मचक्र प्रवर्तन ,वैश्विक प्रचारनामा। 

 तथागत सन्देश बौद्धदर्शन-संघवाद भिख्खुवाद पथ विचलन , 

बौद्धकालीन स्तूप आलेख साक्षी, द्वंद  हीनयान-महायान नामा।।    

 गुप्तकालीन क्षत्रिय राजवंशों का उदय-ब्राह्मणोचित अवदान,

 विष्णुगुप्त -स्कंदगुप्त -चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य  शौर्यादित्यनामा।

 धर्म-दर्शन,मत -पन्थ पाखण्ड प्रेरित अनाचार व्यभिचार अत्याचार   ,

 आदिशंकराचार्य की हुंकार दिग्विजय अद्वैत दर्शन वेदांतनामा।।

 


शक हूण कुषाण तोरमाण यवन नवागन्तुक यायावर कबीले ,

भारतीय 'सनातन संस्कृति' का सर्वस्वीकारोक्ति सिद्धांतनामा। 

पारसी यहूदी  ईसाई यूनानी, अरबी मजहबों का 'हिन्द'आगमन ,

आर्यावर्त भारतवर्ष जम्बूदीप भरतखंडको मिला 'हिन्दुस्ताननामा।।

भारतीय जनता की 'अतिथि देवोभव' स्नेहिल  शरणागत वत्सलता ,

जैन-बौद्ध दर्शन प्रणीत 'अहिंसा परमोधर्म' का उदारचरितनामा।

देशी सामन्तों का विलासितापूर्ण जीवन ,पौरूष विहीन अहंकार ,

और क्रूर कपटी- विदेशी भूँखे भेड़ियों का जघन्य  प्रति घातनामा।।

कासिम, गजनवी, गौरीका रक्त पिपासु बहशी विध्वंशकअभियान  ,

 जयचन्द की गद्दारी व पृथ्वीराज चौहान का गौरी -परोपकारनामा।

  यवन अरब गुलाम ऐबक खिलजी  तुगलक तुर्क हब्शी तथा उजबेग  ,

  खण्ड-खण्ड बिखरे हुए भारत पर बर्बर कबीलोंका हमलावरनामा।।


  कज्जाक, अफगान,लोधी ,मुगल-पठान ,मंगोल -तातार,पिंडारी ,

  लूटते रहे भारतका धन ,नारियोंकी अस्मत, लगाया जजियानामा।

  बनाये जिन भारतीय मजदूरों ने किले ,इमारतें, मजारें और महल ,

  काट दिए गए उनके हाथ ,इतिहास का कडुवा सच कबूलनामा।।

  दमिश्क,बग़दादमें औकात नहीं थी जिनकी खानसामा बननेकी भी  ,

   छल से बन गए दिल्लीश्वर भारत की छातीपर लिख गए बाबरनामा।


  दुर्दांत  बाबर के वंशज भारतकी छाती पर हिन्दू 'काफिरों'के लहु से

 लिखते चले गए हुमायूँ नामा-अकबरनामा और जहांगीरनामा।।

  अय्यास मुगलों ने ही दिया पट्टा लुटेरे पुर्तगालियों डचों अंग्रेजों को,

  जिसकी बदौलत ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने लिख दिया तिजारतनामा।।

  १८५७ के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में हिन्दू -मुस्लिम एक हो गए तो ,

  'डिवाइडेड एन्ड रूल्स ' से बाँटा गया,लागू हुआ विक्टोरिया नामा।

 


 

  बंग-भंग नामा,नरसंहार- जलियाँवालाबाग़ नामा ,

  कांग्रेस ,गाँधी,,नेहरू,पटेल, मौलानाआजाद नामा,

  सुभाष ,भगतसिंह, राजगुरु,सुखदेव,आजाद नामा ,

  ब्रिटिश गवर्नमेंट ,माउन्टवेटन- जिन्ना  इकरारनामा,

   एक ही धरती पर तीन-चार देश क्रूर विभाजन नामा,

   साम्प्रदायिक  तत्वों द्वारा अमानवीय कत्लेआम नामा,

   गांधी को गोली मारकर लिखा नाथूराम ने गोडसेनामा ,

   आधी-अधूरी आजादी और पँ नेहरू का नेतत्व नामा ,
 
    बाबा साहिब - संविधान सम्पादन  भारत गणतंत्र नामा ,

    इंदिराजी का राष्ट्रीयकरण,श्वेतक्रांति हरित क्रांति नामा ,

    बांग्लादेश निर्माण ,पोखरण विस्फोट आपातकाल नामा ,

    राजीव गाँधी का आधुनिकीकरण कम्प्यूटरीकरण  बोफोर्स नामा

गुरुवार, 5 जनवरी 2017

भर्राशाही मची है भाई


रघुकुल रीति सदा चलि आई,

 राजनीती दुष्टों को भायी,

भले श्री राम गए वनराई ,

भरत भाई ने प्रीत निभाई ,

उसी भरत के भारत में अब ,

भाई-भाई में कटुता आई ,

जीत चुनाव वोट की खातिर , 

भाई की हत्या करवाई ,


देशभक्ति  दल वाले भाई ,

आईएस की जूँठन खाई ,

 हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई,

 संग-संग छाने दूध मलाई।

खा पीकर  सब गर्रा गए जब ,

विरोधियों की करें कुटाई,


लगा तुषार फसल को भाई ,

निर्धन किसान पै विपदाआई।

बागड़  खेत चरत है भाई   ,

कैसे दुर्दिन आये भाई  ।


जात पाँत मजहब के बूते ,

लोकतंत्र की  रस्म निभाई।

वे कहते अच्छे दिन आए ,

मजा मौज में लोग लुगाई ,

खबर पढ़ी अखवार में भाई ,

एक बृद्ध देह चूहों ने खाई,

कोई किसी का नहीं है भाई ,

झूँठी आस दिलासा भाई ,

भर्राशाही मची है भाई    ,

जनहित सुध सबने बिसराई !


श्रीराम तिवारी