बुधवार, 5 अक्टूबर 2016

अँधेरे के खिलाफ लड़ने के लिए,,,!


निर्बल निरीह निर्बोध को निगलने के लिए,

 इन्सानियत के दुश्मन हरदम तैयार रहते हैं ,

 जब मचता है चारों ओर हाहाकार -चीत्कार,

 स्याह रातों में सदा शैतान किरदार रहते हैं ,

जंग जरुरी हो जब काली ताकतों के खिलाफ,

 लड़ने के लिए केवल  'शहीद' तैयार रहते हैं ,

खुदा  ईश्वर  गॉड मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारा ,

ये तो अपनी दुकान चलाने को तैयार रहते हैं।

धर्म-मजहब कभी कमजोरों का साथ नहीं देते ,

ताकतवर लोग ही इसे इश्तेमाल करते रहते हैं।

 अज्ञानता और अँधेरे के खिलाफ लड़ने के लिए,

 दीपक जुगनू चाँद सितारे  सूरज तैयार रहते हैं ,

श्रीराम तिवारी





 

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