निर्बल निरीह निर्बोध को निगलने के लिए,
इन्सानियत के दुश्मन हरदम तैयार रहते हैं ,
जब मचता है चारों ओर हाहाकार -चीत्कार,
स्याह रातों में सदा शैतान किरदार रहते हैं ,
जंग जरुरी हो जब काली ताकतों के खिलाफ,
लड़ने के लिए केवल 'शहीद' तैयार रहते हैं ,
खुदा ईश्वर गॉड मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारा ,
ये तो अपनी दुकान चलाने को तैयार रहते हैं।
धर्म-मजहब कभी कमजोरों का साथ नहीं देते ,
ताकतवर लोग ही इसे इश्तेमाल करते रहते हैं।
अज्ञानता और अँधेरे के खिलाफ लड़ने के लिए,
दीपक जुगनू चाँद सितारे सूरज तैयार रहते हैं ,
श्रीराम तिवारी

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