इस दौर की असली सूरत बेहद डरावनी है।
भले ही वेशभूषा आकर्षक और लुभावनी है।।
एटॉमिक हथियारोंके जखीरे यथावत कायम हैं ,
गौर से देखो लगता है कि सारा जग छावनी है।
शासन-प्रशासन ,पुलिस -प्रहरी उनके लिए हैं ,
राजनीति और राज्य सत्ता ,जिनकी पाहूनी है।
सूचना - संचार क्रांति की असीम अनुकम्पा से,
गलाकाट स्पर्धा अलगाव का दौर दुखदायनी है।
श्रीराम तिवारी

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