रविवार, 9 अक्टूबर 2016

राजनीति और सत्ता ,जैसे लोकतंत्र की पाहूनी है। [shriram tiwari]


 इस दौर की असली सूरत बेहद डरावनी है।

 भले ही वेशभूषा आकर्षक और लुभावनी है।।


 एटॉमिक हथियारोंके जखीरे यथावत कायम हैं ,

 गौर से देखो लगता है कि सारा जग छावनी है।


 शासन-प्रशासन ,पुलिस -प्रहरी उनके लिए हैं ,

 राजनीति और राज्य सत्ता ,जिनकी पाहूनी है।


 सूचना - संचार क्रांति की असीम अनुकम्पा से,

 गलाकाट स्पर्धा अलगाव का दौर दुखदायनी है।


                   श्रीराम तिवारी


 

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