बुधवार, 24 अगस्त 2016

मैं जब वयम हो गया । । - [Shriram Tiwri ]

 ऊषा की लालिमा घुली , भोर आगमन हो गया !

  जिंदगी की राह में तभी ,उनसे  मिलन हो गया !!

  दिव्यता अलौकिक हुई  ,अंजुरी में पुष्प थे खिले।
  
  उर्वरा वसुंधरा हो  गई ,दूधिया   गगन  हो गया ।।

  शब्द ओस बिंदु बन गए,  छंद खग कलरव हो गए ।

  जिजीविषा धन्य हो गई ,विचार जब अनंत हो गया।।  

  अर्थपूर्ण मन्त्र सध गए ,कर्म शंखनाद हो  गए ।  

  संघर्ष यज्ञवेदी पर ,स्वार्थ का  हवन हो गया।।

  अहम का वहम न रहा ,जब  मैं -वयम हो गया ।
                                 
  जीवन संग्राम में मेरा ,खुद से मिलन हो गया।।

  जिंदगी की राह में तभी ,उनसे मिलन हो गया।,,,,,,,,,,,,!

                     श्रीराम तिवारी

  

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