बल पौरुष और सत्ता यदि किसी कमजोर के काम आये ।
जवानी यदि देश की सीमाओं पर बल-पौरुष दिखलाये ।।
मानव सत्य-न्याय का सिंहनाद करे क्रांति के गीत गाए।
कृषकाय युवा खेतों में यदि अपना श्रम स्वेद बहाए ।।
जीवन यापन संघर्षों में यदि इंसानियत न भूल पाए ।
लोभ-लालच की भृष्ट व्यवस्था का पुर्जा न बन जाए ।।
कृषकाय युवा खेतों में यदि अपना श्रम स्वेद बहाए ।।
जीवन यापन संघर्षों में यदि इंसानियत न भूल पाए ।
लोभ-लालच की भृष्ट व्यवस्था का पुर्जा न बन जाए ।।
'जनवादी कवि' इसको ही मानव अनुशासन कहते हैं ।
योगीजन शायद इसको शरीर अनुशासन कहते हैं।।
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योगीजन शायद इसको शरीर अनुशासन कहते हैं।।
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जिस धीरोदात्त चरित्र सिंहनाद से अन्यायी थर्राते हैं।
अमृतवाणी समरसता की शब्द क्रांति दूत बन जाते हैं ।।
वो सिंहनाद जिससे कि हर युग में नव मानव ढलते हैं ।
जन महानाद संगीत कला साहित्य सृजन करते हैं।।
'सत्यम शिवम् सुंदरम' भी जब इंकलाब बन जाते हैं ।
'जनवादी कवि 'उसको ही जनक्रांति सुशासन कहते हैं।।
योगीजन शायद उसको केवल बाचानुशासन कहते हैं ।
जन महानाद संगीत कला साहित्य सृजन करते हैं।।
'सत्यम शिवम् सुंदरम' भी जब इंकलाब बन जाते हैं ।
'जनवादी कवि 'उसको ही जनक्रांति सुशासन कहते हैं।।
योगीजन शायद उसको केवल बाचानुशासन कहते हैं ।

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