मंगलवार, 24 मई 2016

जीवन यापन संघर्षों में यदि इंसानियत न भूल पाए । [A poem by :-Shriram Tiwari ]



    बल पौरुष और सत्ता यदि किसी कमजोर के काम आये ।

    जवानी यदि  देश की सीमाओं पर बल-पौरुष दिखलाये ।।

    मानव सत्य-न्याय का सिंहनाद करे क्रांति के गीत गाए। 

    कृषकाय युवा  खेतों में यदि अपना श्रम स्वेद बहाए ।।

    जीवन यापन संघर्षों में यदि  इंसानियत न भूल पाए ।

   लोभ-लालच की भृष्ट व्यवस्था का पुर्जा न बन जाए ।।

   'जनवादी कवि' इसको ही मानव अनुशासन कहते हैं ।

   योगीजन  शायद इसको शरीर अनुशासन कहते हैं।।

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  जिस धीरोदात्त चरित्र सिंहनाद से अन्यायी थर्राते हैं।

  अमृतवाणी समरसता की शब्द क्रांति दूत बन जाते हैं ।।

  वो सिंहनाद जिससे कि  हर युग में नव मानव ढलते हैं  ।

  जन महानाद  संगीत कला साहित्य सृजन करते हैं।।

  'सत्यम शिवम् सुंदरम' भी जब इंकलाब बन जाते  हैं ।

  'जनवादी कवि 'उसको ही जनक्रांति सुशासन कहते हैं।।

  योगीजन शायद उसको केवल बाचानुशासन कहते हैं ।

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