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जनवादी काव्य
सोमवार, 12 दिसंबर 2016
फूल थे, रंग थे ,लम्हों की सबाहत हम थे ,
ऐंसे जिन्दा थे कि जीने की अलामत हम थे ,
अब तो खुद अपनी जरूरत भी नहीं है हमको ,
वो दिन भी थे कि कभी उनकी जरूरत हम थे।
[एतबार साजिद की कलम से ]
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मेरे बारे में
जनवादी कवि
my son Dr praveen tiwari working in the "liveindia"as an anchor and my daughter in law archana tiwari also working in the Zee news as an anchor.my wife is urmila tiwari & my daughter is anamika upadhyaay.my grand sons are akshat and chaitanya.
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