सोमवार, 21 नवंबर 2016

क्या बाकई मेंरा देश आगे बढ़ रहा है?


  मेरा देश ,,मेरा देश ,,मेरा देश ,,,आगे बढ़ रहा है ,,,,,गरीब की रसोई से धुंआँ हट रहा है ! भारत संचार निगम लिमिटेड के किसी अधिकारी  को जब मोबाइल पर रिंग करो तो अक्सर यह देशभक्तिपूर्ण  टोन सुनाई देती है।

 देश के वर्तमान हालात को देखकर उन्हें अब यह टोन रिकार्ड कर लेना चाहिए :.........


पटरियां उखड़ रहीं हैं ,डिब्बे पलट रहे हैं।

रेल दुर्घटनाओं में लोग बेतहाशा मर रहे हैं।।

नोटबंदी के कारण  देश में मची है किल्लत ,

आबाल-बृद्ध नर-नारी कुछ बेमौत मर रहे हैं।

 बदमाश चोट्टे अपना कालाधन दिन दहाड़े ,

  पिछले दरवाजे से बाकायदा सफेद कर रहे हैं।

डालर और विश्व की करेंसी ऊपर चढ़ रही है,

मगर भारतीय  रूपये के क्यों दाम घट रहे  हैं।

सीमाओं पर जवानों का लहू  सस्ता बह रहा है  ,

और केवल सत्ताधारी नेताओं के भाव बढ़ रहे हैं।

 कौन कहता है  गरीबकी रसोईसे धुँआँ घट रहा है,

 हकीकत में तो गरीब की रसोई में चूहे मचल रहे हैं।

  यदि  बाकई मेंरा देश आगे बढ़ रहा है तो क्यों ,

  अंतर्राष्टीय सूचकांक में हम   नीचे  गिर रहे हैं।

  ये नोटबंदी  ये जुमले ये  चोंचले पाखण्ड है सब ,

  देश जड़वत है केवल  नेताओं की  तेवर बदल रहे हैं।


   श्रीराम तिवारी

 

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