मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016

असुरक्षित है आज ,वतन पर छाया संकट।। [Shriram Tiwari]



 अमर शहीदों के ह्रदय ,होगा दुखद मलाल।

 देश की सत्ता में घुसे  ,रिश्वतखोर  दलाल।।

 रिश्वतखोर दलाल ,स्वार्थी  कपटी  लम्पट।

 असुरक्षित है आज ,वतन पर छाया संकट।।

 नागफाँस जातीय ,नस्ल मजहब का जहर।

 पीकर नहीं हो सकता , कोई भी राष्ट्र अमर।।

                  श्रीराम तिवारी

रविवार, 9 अक्टूबर 2016

राजनीति और सत्ता ,जैसे लोकतंत्र की पाहूनी है। [shriram tiwari]


 इस दौर की असली सूरत बेहद डरावनी है।

 भले ही वेशभूषा आकर्षक और लुभावनी है।।


 एटॉमिक हथियारोंके जखीरे यथावत कायम हैं ,

 गौर से देखो लगता है कि सारा जग छावनी है।


 शासन-प्रशासन ,पुलिस -प्रहरी उनके लिए हैं ,

 राजनीति और राज्य सत्ता ,जिनकी पाहूनी है।


 सूचना - संचार क्रांति की असीम अनुकम्पा से,

 गलाकाट स्पर्धा अलगाव का दौर दुखदायनी है।


                   श्रीराम तिवारी


 

बुधवार, 5 अक्टूबर 2016

अँधेरे के खिलाफ लड़ने के लिए,,,!


निर्बल निरीह निर्बोध को निगलने के लिए,

 इन्सानियत के दुश्मन हरदम तैयार रहते हैं ,

 जब मचता है चारों ओर हाहाकार -चीत्कार,

 स्याह रातों में सदा शैतान किरदार रहते हैं ,

जंग जरुरी हो जब काली ताकतों के खिलाफ,

 लड़ने के लिए केवल  'शहीद' तैयार रहते हैं ,

खुदा  ईश्वर  गॉड मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारा ,

ये तो अपनी दुकान चलाने को तैयार रहते हैं।

धर्म-मजहब कभी कमजोरों का साथ नहीं देते ,

ताकतवर लोग ही इसे इश्तेमाल करते रहते हैं।

 अज्ञानता और अँधेरे के खिलाफ लड़ने के लिए,

 दीपक जुगनू चाँद सितारे  सूरज तैयार रहते हैं ,

श्रीराम तिवारी