शनिवार, 16 सितंबर 2017

जुदाई गीत -श्रीराम तिवारी

  1. जरा दिल को तसल्ली दो,आरत सुनो मेरी।
    रोको रवानी को,तुम्हें जल्दी भी क्या ऐंसी।।
    लगी दिल की बुझालें हम, तबतुम चले जाना।
    गम अपना सुना दें हम ,तब तुम चले जाना।।
  2. ...
  3. अरे चोट दिल में लगी, तुमसे बिछुड़ने की।
    एक सूरत बसी दिल में,हरदम सलोनी सी।।
    प्रीत अनमोल कैसी है,ए हमने अब जाना।
    गम अपना सुना दें हम, तब तुम चले जाना।।
  4. इतना ही था मिलन,आई वेला जुदा होने ।
    होश उड़े हैं मेरे ,अंत मेरा खुदा जाने ।।
    मैं जरा होश मैं आऊं ,तब तुम चले जाना।
    गम अपना सुना दें हम, तब तुम चले जाना।।
  5. मन हल्का तो होने दो, हम गम के मारे हैं।
    हमको न भुला देना ,सदा हम तुम्हारे हैं।।
    नफरतों के दौर में ,यारी को निभा जाना।
    गम अपना सुना दें हम, तब तुम चले जाना।।
  6. हमें गम जुदाई का,देकर के तुम चल दिए।
    पलकोंमें बसाकर तुम्हें,वक्त ने छल किये।।
    तुम बिन कैसे जियें, जरा ये तो बता जाना।
    गम अपना सुना दें हम, तब तुम चले जाना।।
  7. ये आदत पुरानी है ,गमें चोट खाने की।
    जबजब जागे नसीब,आये बेला रुलाने की।।
    तुमने पीर पराई को,कुछ देखा सुना जाना।
    गम अपना सुना दें हम, तब तुम चले जाना।।
  8. खूब चाहा तुम्हें हमने, हमको न भुला देना।
    ग़मों को हमारे तुम ,अपना न बना लेना ।।
    दिल का जख्म भर दे, दवा ऐंसी दे जाना।
    गम अपना सुना दें हम तब तुम चले जाना।।
  9. जुदाई गीत -श्रीराम तिवारी (मेरी पुस्तक अनामिका से)

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