शनिवार, 2 सितंबर 2017

बच नहीं पाओगे !

  1. हंसोगे अगर तो हँसेगी साथ दुनिया
    रोओगे तो रहोगे निपट अकेले मनमार!
    खुशी है ऐसी शै जो हम ढूंढते हैं बाहर ,
    और गमों के भर रखें हैं भीतर भण्डार!
  2. ठहाका लगाओ तो आसमां गूँज उठेगा ,
    आह भरो तो पाओगे हर शख्स मौन है !
    हर्ष उल्लासों की प्रतिध्वनियां मन पसंद,
    मौन-मंद सिसकी तुम्हारी सुनता कौन है ?
  3. खुशियां अगर बांटो तो लोग आएंगे तेरे दर,
    दिखाओगे अपने गम, तो सब भाग जायेंगे !
    हिस्सा आपके सुख में सभी बंटाना चाहेंगे ,
    चाहते हुये भी दूसरे दु:ख नहीं बांट पायेंगे !
  4. सुखके दिनों में तो सब ही बन जाते मीत ,
    दुःख में कोई साथ दे ढूँडते रह जाओगे !
    जब तक है मौज खैरियत पूंछते रहेंगे सब,
    गर्दिश में ईद के चाँद देखते रह जाओगे !
  5. यदि तुम कभी दावत दोगे तो भीड़ जुटेगी,
    किंतु फाकें में साथ देनें कोई नही आ्येगा !
    ज़िन्दगी में सब साथ देंगे,अगर सफल रहो,
    मरते हुये किसी के कोई काम नहीं आयेगा !
  1. श्रीराम तिवारी


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