हंसोगे अगर तो हँसेगी साथ दुनिया
रोओगे तो रहोगे निपट अकेले मनमार!
खुशी है ऐसी शै जो हम ढूंढते हैं बाहर ,
और गमों के भर रखें हैं भीतर भण्डार!
ठहाका लगाओ तो आसमां गूँज उठेगा ,
आह भरो तो पाओगे हर शख्स मौन है !
हर्ष उल्लासों की प्रतिध्वनियां मन पसंद,
मौन-मंद सिसकी तुम्हारी सुनता कौन है ?
खुशियां अगर बांटो तो लोग आएंगे तेरे दर,
दिखाओगे अपने गम, तो सब भाग जायेंगे !
हिस्सा आपके सुख में सभी बंटाना चाहेंगे ,
चाहते हुये भी दूसरे दु:ख नहीं बांट पायेंगे !
सुखके दिनों में तो सब ही बन जाते मीत ,
दुःख में कोई साथ दे ढूँडते रह जाओगे !
जब तक है मौज खैरियत पूंछते रहेंगे सब,
गर्दिश में ईद के चाँद देखते रह जाओगे !
यदि तुम कभी दावत दोगे तो भीड़ जुटेगी,
किंतु फाकें में साथ देनें कोई नही आ्येगा !
ज़िन्दगी में सब साथ देंगे,अगर सफल रहो,
मरते हुये किसी के कोई काम नहीं आयेगा !
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