शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017


'सारे जहाँ से अच्छा ,हिन्दोस्ताँ हमारा ........' लिखने वाले अल्लामा मोहम्मद इकवाल साहब की पुण्य तिथि पर उनका हार्दिक अभिवादन!वेशक पाकिस्तान बनने पर ,वे भारत छोड़ गए! किन्तु उनकी धर्मनिरपेक्ष शायरी हमेशा 'हिंदी हैं हम वतन हैं हम और हिन्दोस्ताँ हमारा' का पैगाम युगों-युगों तक देती रहेगी !
ज्वालन  के जाल बिकराल बरषत है।

तचति धरनि जग जरति झरनि  सीरी ,

छाँह को पकरि पंथी पंछी बिलमत है।

'सेनापति' नेक दुपहरी के ढरत होत ,

घमका विषम ज्यों न पात खरकत है।

मोरे जान पौन सीरी ठौरको पकरि कोनों ,

घरी एक बैठ कहूं घामहु  वितवत है।

[ ग्रीष्म ऋतु का इससे बेहतर काव्यात्मक वर्णन मैं नहीं कर सकता, इसलिए 'सेनापति'के कवित्त को उद्धृत कर रहा हूँ,ग्रीष्म ऋतु में कवित्त का आनंद लेवें

बुधवार, 19 अप्रैल 2017

नित नई कठिन चुनौतियां,मुल्क हुआ हैरान।

लाल बत्ती बन्द भइ , नेता भये अधीर।
पद प्रतिष्ठा अहम बिन,पिद्दा हुए वजीर।।
         
सत्ता मृग मारीचिका,जाने सकल जहान। 
दंड कमंडल छोड़कर,योगी हुए महान।।

मोदीजी के मन बसी ,केवल एक ही बात।
कैशलेस सबको करो,मारो बैंक को लात।।

नित नई कठिन चुनौतियां,मुल्क हुआ हैरान।
महंगाई आतंक का , हुआ न कोई निदान ।

पुलिस दमन शोषण घुटन,भॄस्ट तंत्र नाकाम।
मूल्यहीनता चरम पर,भ्रमित सकल आवाम।।

राजनीति ने पी रखा ,जातिवाद का जाम।
धर्मनिपेक्षता यों हुई ,ज्यों मुन्नी बदनाम।।

जोशी अडवानी चिंतित ,सुश्री उमा अधीर ।
मस्जिद मंदिर विषय में, हुआ कोर्ट गंभीर।।

न विचार न नीति कोई ,न विकास के काम।
सेना को अपमानित करें ,पत्थरबाज तमाम।

श्रीराम तिवारी



 

श्रीराम तिवारी