मंगलवार, 26 जुलाई 2016

सलमान के भाग बड़े सजनी ,,,,,,,[poem-by Shriram Tiwari]


कानून की आँखों पर पट्टी और बंद कान हैं।

हत्यारा बेक़सूर सावित ,बजरंगी भाईजान हैं।।

बाल भी बांका नहीं हुआ उस दबंग हत्यारे का।

क्योंकि निर्लज्ज नंगे के ,सदा नौ ग्रह बलवान हैं।।

दुनियाँ में कहाँ ऐंसा सबका नसीब है साथियो?

क्या न्याय के पहरुए  ऐंसे सब पै मेहरवान हैं ??

चिंकारों का कत्ल हो या फुटपाथियों की मौत।

ये तो हरी इच्छा प्रबल और भावी बलवान हैं।।

रुपया -रुतवा साधन शोहरत  ईश्वर से बड़े है ।

वह गधा पहलवान, जिस पर खुदा मेहरवान हैं।।

-:श्रीराम तिवारी :-

सोमवार, 25 जुलाई 2016

दम्भ -पाखंड की जद में फिर आ गए हम !


निकले थे घर से जिसकी बारात लेकर , उसी के जनाजे में क्यों आ गए हम !
चढ़े थे शिखर पर जो विश्वास् लेकर , निराशा की खाई में क्यों आ गिरे हम !!

गाज जो गिराते हैं नाजुक दरख्तों पै , उन्ही की पनाहों में क्यों  जा गिरे हम !
फर्क ही नहीं जहाँ नीति -अनीति का ,संगदिल महफ़िल में खुद आ गए हम !!
खींचते है चीर गंगा जमुनी तहजीव का ,वे तेवर दुशासन के खुद ला रहे हम !
लगती रही  जिधर दावँ पर पांचाली ,शकुनि के जुआ घर में फिर आ गए हम  !!
कर सकते नहीं कद्र अपने  वतन की , दम्भ -पाखंड की जद में  आ गए हम !
 है - खूनी भयानक बर्बर अँधेरी ,उस वामी  के मुहाने पर  फिर आ गए हम ! !

श्रीराम तिवारी