हरेक रात के बाद ,एक नयी सुबह आती है।
उम्र का काम है गुजरना ,सो गुजर जाती है।।
अपनी ख्वाइशों को मोहब्ब्त का नाम न दो ,
मोहब्बत तो इबादत है जो सुर्खुरु बनाती है ।
जिंदगी ऐंसी हो कि जीने को मजबूर करे।
राह ऐंसी हो कि चलने को मजबूर करे।
खुशबू कभी कम न हो उमङ्ग भरे जीवन की ,
रिस्ता रूहानी हो और जीने को मजबूर करे।
ढलती संध्या के श्यामल आहत क्षण में उत्स
जीवन नभ में ज्यों विधु कुमकुम छिटका हो।
धरती अम्बर जगतीतल संग गावें जीवन गान ,
आशाओं के दीप जलें- भले ही जीवन ढलता हो।
:-श्रीराम तिवारी।
उम्र का काम है गुजरना ,सो गुजर जाती है।।
अपनी ख्वाइशों को मोहब्ब्त का नाम न दो ,
मोहब्बत तो इबादत है जो सुर्खुरु बनाती है ।
जिंदगी ऐंसी हो कि जीने को मजबूर करे।
राह ऐंसी हो कि चलने को मजबूर करे।
खुशबू कभी कम न हो उमङ्ग भरे जीवन की ,
रिस्ता रूहानी हो और जीने को मजबूर करे।
ढलती संध्या के श्यामल आहत क्षण में उत्स
जीवन नभ में ज्यों विधु कुमकुम छिटका हो।
धरती अम्बर जगतीतल संग गावें जीवन गान ,
आशाओं के दीप जलें- भले ही जीवन ढलता हो।
:-श्रीराम तिवारी।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें