रविवार, 20 मार्च 2016

नव पल्लव - नव् सुप्रभात हो - श्रीराम तिवारी



   वही  देश का मालिक हो  , हाथ कुदाली छैनी हो !

   सामाजिक  समरसता हो , लोकतंत्र  की  बेणी  हो !!


   उंच नीच का भेद न हो ,जन  गण  मन  त्रिवेणी हो !

   नर -नारी सब मिलकर बोलें  ,इंकलाब की बेनी हो!!


   मानवता भ्रातत्वभाव की  ,नीति नियति नसेनी हो !

  समझबूझ विज्ञान ज्ञानमय ,साखी शबद रमैनी हो ! !


   जनता खुद  जननायक हो , प्रभुता  चना चवैनी हो !

   अजातशत्रु  हो राष्ट्र सभी  ,क्यों मात किसी को देनी हो !!


    नव पल्लव  - नव् सुप्रभात हो , नव खग कलरव भरणी हो !

    नव मानव नव -नव नीर -क्षीर ,नव केवट नव तरणी  हो !!

        श्रीराम तिवारी 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें