वही देश का मालिक हो , हाथ कुदाली छैनी हो !
सामाजिक समरसता हो , लोकतंत्र की बेणी हो !!
उंच नीच का भेद न हो ,जन गण मन त्रिवेणी हो !
नर -नारी सब मिलकर बोलें ,इंकलाब की बेनी हो!!
मानवता भ्रातत्वभाव की ,नीति नियति नसेनी हो !
समझबूझ विज्ञान ज्ञानमय ,साखी शबद रमैनी हो ! !
जनता खुद जननायक हो , प्रभुता चना चवैनी हो !
अजातशत्रु हो राष्ट्र सभी ,क्यों मात किसी को देनी हो !!
नव पल्लव - नव् सुप्रभात हो , नव खग कलरव भरणी हो !
नव मानव नव -नव नीर -क्षीर ,नव केवट नव तरणी हो !!
श्रीराम तिवारी

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