बुधवार, 30 मार्च 2016

संघर्षों की सही दिशा है ,भगतसिंह की वाणी में। -[Shriram Tiwari ]





  माल समेटकर भागा माल्या ,बैंक अजब हैरानी में।

  मंद -मंद मुस्कराए मंत्रीवर , भैंस गयी जब पानी में।।

 
  सुरा सुंदरी सब कुछ पाया  , माल्या ने आसानी  में।

  ईपीएफ और वेतन डूबा  ,किंगफिशर है हानी  में।।


  काले धन  वालों की सीरत ,छिपी कपट की बानी में।

  लोकतंत्र के चारों खम्बे ,  सिस्टम  की नादानी में।।


  लुटिया डूबी  अर्थ तंत्र की , सकल बैंक  हैरानी  में।

  निर्धन जन ही रोता रहता  ,कुर्की खींचातानी  में।


  कॉरपोरेट पूँजी की जय-जय , ग्लोबल कारस्तानी में।

  निर्धन -निबल बटे  आपस में ,धर्म -जाति की घानी में।


  संघर्षों की  सही दिशा  तो   ,भगतसिंह  की  वाणी में।

  बलिदानों की गाथा गूंजे , भारत अमर कहानी में  ।।

 
                     श्रीराम तिवारी
 

काजू-किशमिश हो गयी ,देशी अरहर दाल ! [ Dohe- Shriram Tiwari]


आतंकी उन्माद का , बड़ा भयंकर शोर ।

 मजहब के पाखण्ड की ,हवा चली घनघोर ।।


  राजनीति के मार्ग पर ,निहित स्वार्थकी भीड़।

  लोकतंत्र ने रच दिए , नए नारों की नीड़ ।।


   जात-पाँत की रैलियाँ ,भाषण बोल कबोल ।

   वोट जुगाडू खेल हैं ,बाजें नीरस ढोल ।।


  पक्ष-विपक्ष प्रमादवश ,कोई नहीं गम्भीर।

  एक दूजे पर छोड़ते ,बातों के शमशीर।।



  भारत के जनतंत्र को ,लगा भयानक रोग।

  लोकतंत्र को खा  गए ,घटिया शातिर लोग।।


  नयी आर्थिक नीति ने , देश  किया कंगाल।

  काजू-किशमिश हो गयी ,देशी अरहर दाल।।


  रुपया खाकर बैंक का ,माल्या हुआ फरार।

  नेता संसद में करें ,फोकट की तकरार।।


   एशियन टाइगर मस्त हैं ,लातीनी खुशहाल।

  अखिल विश्व बाजार में ,भारत क्यों बदहाल ।।


 अच्छे दिन इनके हुए  ,नेता-ठग दलाल ।

 मुठ्ठी भर धनवान भये ,बाकी सब  कंगाल।।


  जात- वर्ण आधार पर , आरक्षण  की नीति।

   बढ़ी  बिकट असमानता ,पूंजीवाद की प्रीत ।।


   आवारा पूँजी  कुटिल , व्याप रही  सब ओर।

    इसीलिये  भयमुक्त  हैं ,चोर  मुनाफाखोर।।


   बढ़ते व्यय के बजट की ,कुविचारित यह नीति ।

   ऋण पर ऋण लेते रहो ,गाओ ख़ुशी के गीत    ।।


   रातों-रात ही  हो गए ,राष्ट्र रत्न नीलाम।

   औने -पौने बिक गए ,बीमा -टेलीकॉम।।


  लोकतंत्र की पीठ पर ,लदा  माफिया आज ।

  ऊपर से नीचे तलक , भृष्ट  कमीशन काज  ।।


  वित्त निवेशकों के लिए ,तोड़ दिए तटबंध।

  आनन-फानन कर चले ,जन  विरुद्ध अनुबंध।।


  पूँजी मिले विदेश से ,और तकनीक तत्काल।

  देश विरोधी संधियां, अब जी का जंजाल।। 


 अण्णा तब अनशन किया ,लोकपाल के भेद   ।

  यूपीए का  कर दिया ,सत्ता से उच्छेद।।


  एनडीए  के राज में , भई भ्रुष्टन की धूम  ।

  अब अण्णा जी मौन है, बुद्धि से महरूम ।।

   श्रीराम तिवारी

 







 













 


 


















   







रविवार, 20 मार्च 2016

नव पल्लव - नव् सुप्रभात हो - श्रीराम तिवारी



   वही  देश का मालिक हो  , हाथ कुदाली छैनी हो !

   सामाजिक  समरसता हो , लोकतंत्र  की  बेणी  हो !!


   उंच नीच का भेद न हो ,जन  गण  मन  त्रिवेणी हो !

   नर -नारी सब मिलकर बोलें  ,इंकलाब की बेनी हो!!


   मानवता भ्रातत्वभाव की  ,नीति नियति नसेनी हो !

  समझबूझ विज्ञान ज्ञानमय ,साखी शबद रमैनी हो ! !


   जनता खुद  जननायक हो , प्रभुता  चना चवैनी हो !

   अजातशत्रु  हो राष्ट्र सभी  ,क्यों मात किसी को देनी हो !!


    नव पल्लव  - नव् सुप्रभात हो , नव खग कलरव भरणी हो !

    नव मानव नव -नव नीर -क्षीर ,नव केवट नव तरणी  हो !!

        श्रीराम तिवारी 

शनिवार, 5 मार्च 2016



लम्हा-लम्हा सरकती जिंदगी ,को कुछ इस तरह जी लिया।

कुछ से  कृतज्ञता व्यक्त की ,कुछ का एहसान मान लिया।।  श्रीराम तिवारी।।

 

शुक्रवार, 4 मार्च 2016


हिंदी व्याकरण अध्येताओं और हिंदी साहित्य के विद्यार्थियों के लिए यमक अलंकार का एक आधुनिक उदाहरण :-


नगरनिगम असफल हुई ,जल सप्लाई निदान।

जलकर बिल भरते नहीं ,जलकर ही नादान।।  


प्रस्तोता :-श्रीराम तिवारी