बुधवार, 21 जून 2017

क्यों फूलों को खार बनाने पर आमादा हैं !

वो जो भारत के खिलाफ हथियार उठाने वाली है ।
वो जो कश्मीरी युवतियों को भड़काने वाली है ।।
वो वतनपरस्त नहीं अबला दुख्तराने हिन्द भी नहीं,
वो गद्दार पाकिस्तानी जनरलों की बदनाम साली है ।

जो शख्स अपने मजहब को देश से ऊपर रखता है।
जो सत्ता में होकर एक खास धर्म से रिस्ता रखता है।।
जो लोकतंत्र धर्मनिर्पेक्षता समाजवाद से बैर रखता है,
वो देशभक्त नहीं, शूरमा नहीं, शिखंडी सा लगता है।

क्यों लोग निरंतर फूलों को खार बनाने पर आमादा हैं !
क्यों किशोर -युवाओं को अंगार बनाने पर आमादा हैं!!
क्यों खेतों खलिहानों की पावन महकती सौंधी मिट्टी को,
धर्म जात मजहब की दरो दीवार बनाने पर आमादा हैं!

श्रीराम तिवारी




गुरुवार, 15 जून 2017

गाज गिरती है सिर्फ कमजोर दरख्तों पर !

मायिक बंधन से जीव देह इक आती इक जाती है।
काल वहीँ ठहरा है सिर्फ अंधी राह गुजर जाती है।।
दृश्य जगत की सुबह हो या शाम, ख़ुशी हो या गम ,
उत्थान हो या पतन, जिंदगी यों ही गुजर जाती है।
भोगियों ,योगियों, रोगियों, देहधारियों, की तमाम,
रूहानी ताकत भौतिक माँग पूर्ति में गुजर जाती है।
वेशक होगा कोइ सर्वशक्तिमान,सर्वज्ञ सनातन सर्वत्र,  
किन्तु कभी कभी उससे भी बड़ी चूक हो जाती है।
कमजोरों पर शक्तिशाली का वर्चस्व कैसा कर्मफल ?
जब न्याय तुला उसकी बलवान के पक्षमें झुक जाती है।

हैं अनंत ब्रह्माण्ड में अनंत नीहारिकाएँ,नक्षत्र,सूर्य चंद्र ,
हरेक निर्बल वस्तु शक्तिशाली का प्रभुत्व सहती जाती है।
कोई ईश्वर नहीं कहता कि निर्बल का शोषण- दमन करो ,
जिसने सब जग सृजा दुनिया उसके वन्दों को क्यों सताती है।

हर युग में वह अनंत असीम अपने उत्कृष्ट चाहने वालों के
ध्यानमें आकर आकर कहता है ,मुझे तुम्हारी याद आती है ।

गाज गिरती है केवल कोमल दरख्तों- कमजोर झोपडों पर,
शस्य स्यामल धरा की दुर्दशा देख सुनामी भी मुस्कराती है!

श्रीराम तिवारी