मंगलवार, 5 दिसंबर 2017

जन -गण -मन त्रिवेणी हो !

वही देश का मालिक हो ,जिस हाथ कुदाली छेनी हो !
जो बात सभी के हित की हो,वो बात जुबांसे कहनी हो !!
सच्ची सामाजिक समरसता हो, न ऊंच नीच की श्रेणी हो !
अभिव्यक्ति की आजादी हो ,कहीं न फासीवाद नसैनी हो!!
धर्मनिरपेक्षता समाजवाद लोकतंत्र गंगा जमुना त्रिवेणी हो !
न कोई नंगा भूंखा शोषित हो, न जाति पांत  की बैनी हो !!
मूल्य आधारित शासन हो,सलाह मेहनतकशों से लेनी हो !
समझ जिन्हें हो भले बुरे की,राष्ट्र की सत्ता उनको देनी हो !!
श्रीराम तिवारी